
प्रधानमंत्री से आङ्देम्बे का सवाल: अध्यादेश के जरिए संसद की गरिमा का अपमान क्यों?
१५ वैशाख, काठमाडौं। कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने संसद अधिवेशन स्थगित कर अध्यादेश के माध्यम से कानून लाने के सरकार के कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निर्मित सरकार पर अलोकतांत्रिक व्यवहार करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में आङ्देम्बे ने इसे केवल प्रक्रिया ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की प्रवृत्ति को भी ध्यान में रखते हुए कहा कि संसद चलने के दौरान अध्यादेश लाना अनुचित है।
सरकार द्वारा दो अध्यादेश राष्ट्रपतिजी के समक्ष प्रस्तुत करने पर उन्होंने यह कदम दुःखद और गंभीर बताया। उनके अनुसार अध्यादेश उस स्थिति में ही जारी किया जाता है जब संसद नहीं चल रहा हो और देश को तत्काल आवश्यक कदम उठाने की जरूरत हो। लेकिन वर्तमान में किसी आपात स्थिति का अभाव है और संसद अधिवेशन में आवश्यक बिल पारित किया जा सकता है, फिर भी अध्यादेश लाने की कोशिश करना अनुचित है।
मुख्य विपक्ष और अन्य दलों से सामान्य परामर्श के बिना किए गए इस जल्दबाजी भरे निर्णय को आङ्देम्बे ने ‘बलाचार के राजनीति’ के रूप में चित्रित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए अपनी पार्टी की बहुमत पर अविश्वास क्यों दिखाया जा रहा है, इसका भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और महत्वपूर्ण अर्थ का अवमूल्यन किया गया है और इस पर उनकी पार्टी स्पष्ट विरोध करती है।
विज्ञप्ति में संवैधानिक परिषद से संबंधित विधेयक और सहकारी कानून संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा और सहमति से समाधान निकालने पर जोर दिया गया है। सरकार द्वारा संसद अधिवेशन स्थगित कर अध्यादेश जारी करना कांग्रेस ने ‘पूरी तरह अनुचित’ माना है। हालांकि, कांग्रेस ने सरकार को रचनात्मक सहयोग देने की अपनी तत्परता भी व्यक्त की है। लेकिन लोकतंत्र, जनमत, सार्वभौम संसद और संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत कदमों को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।