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‘सुकुम्बासी की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन के बाद ही सार्वजनिक जमीन खाली की जाएगी’

१७ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने बताया है कि वास्तविक सुकुम्बासी लोगों की पहचान कर उनके सुरक्षित प्रबंधन के बाद ही अतिक्रमित सार्वजनिक और सरकारी जमीनों को खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वर्षा ऋतु के शुरू होने के संदर्भ में काठमांडू उपत्यका के बागमती और इसकी सहायक नदियों के किनारे बनी जोखिमपूर्ण बस्तियों को लक्ष्य करके २०८३ वैशाख १२ से विशेष अभियान शुरू किया गया है। जनधन सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देते हुए थापाथली, शांतिनगर, गैरीगाउँ और कागेश्वरी मनोहरा नगरपालिकाओं के गोठाटार, बुद्धचोक और मनोहरा टोला की जोखिमपूर्ण बस्तियाँ खाली कराई जा चुकी हैं।

इस संबंध में शहरी विकास मंत्री सुनील लम्साल ने स्पष्ट किया कि वर्षा ऋतु में बाढ़ के उच्च जोखिम वाले नदी किनार की इन बस्तियों को मानव सुरक्षा के दृष्टिकोण से खाली कराया गया है। मंत्री लम्साल ने बाकी क्षेत्रों में मौजूद सुकुम्बासी लोगों के मामले में कहा कि उनकी पहचान और उचित प्रबंधन योजना बनाये बिना जमीन खाली करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और वास्तविक सुकुम्बासी परिवारों को आश्वस्त किया। यह अभियान सरकार की नीतिगत निर्णयों के अनुसार चल रहा है, उनके कथनानुसार।

पिछले वर्ष चैत्र १३ को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृत ‘‘शासकीय सुधार संबंधी एक सौ कार्यसूची’’ के बिंदु संख्या ९२ में सार्वजनिक जमीन के संरक्षण, डिजिटल अभिलेख तैयार करने और नए अतिक्रमण को कड़ाई से रोकने की व्यवस्था की गई थी। इसी नीति को लागू करने के लिए संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने इसी वैशाख १७ को पूरे देश के सभी स्थानीय तहों को परिपत्र जारी किया है। स्थानीय सरकार सञ्चालन अधिनियम, २०७४ के अनुसार स्थानीय तहों की मुख्य जिम्मेदारी है अपने क्षेत्र की सार्वजनिक संपदा का संरक्षण, इसलिए मंत्रालय ने संबंधित पालिका को सुकुम्बासी की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन के ठोस योजना बनाने का निर्देश दिया है।

प्रबंधन प्रक्रिया में उनके आधारभूत मानवाधिकारों के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है। सुकुम्बासी प्रबंधन के दौरान सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य उपचार, पौष्टिक आहार, गोपनीयता संरक्षण तथा महिला और विकलांगजन मैत्री आवास और सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय तहों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि सरकार सुकुम्बासी की पहचान और प्रबंधन के बाद ही सरकारी जमीन खाली करने की योजना में दृढ़ है और यह कार्य संवेदनशील होने के कारण स्थानीय तहों को जिम्मेदार एवं मानवतावादी भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

इस विषय में और स्पष्टता देते हुए गृह मंत्रालय ने सभी जिला प्रशासन कार्यालयों को परिपत्र जारी किया है। मंत्रालय ने कहा है कि स्थानीय तह ही सुकुम्बासी की पहचान और प्रबंधन योजना बनाएंगे और अतिक्रमण हटाने के दौरान स्थानीय जनता को पूर्व सूचना दे कर जागरूक किया जाएगा। आवश्यक होने पर ही जिला प्रशासन सुरक्षा प्रबंध करेगा, यह गृह मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया है। सरकार सार्वजनिक संपदा के संरक्षण और वास्तविक सुकुम्बासी के सम्मानजनक पुनःस्थापन दोनों कार्यों को संतुलित और मानवीय ढंग से आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री वलेंद्र शाह के प्रेस और अनुसंधान विज्ञ दीपा दाहाल ने कहा, ‘सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर बसे वास्तविक सुकुम्बासी चिंता करने की कोई वजह नहीं है। उनकी सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।’

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