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चेर्दुङ की तस्वीरों की प्रदर्शनी का आयोजन

१४ जेठ, काठमांडू। दोलखा के हिल स्टेशन चेर्दुङ (३,६९० मीटर) को प्रचारित करने के उद्देश्य से पत्रकार जीवन लामाले द्वारा खींची गई तस्वीरों की प्रदर्शनी काठमांडू में शुरू हो गई है। जिरि उपत्यका और सूरी गाँव के शिखर पर स्थित हिल स्टेशन चेर्दुङ की तस्वीरों की यह प्रदर्शनी गुरुवार से नयाँ बानेश्वर के ‘उमोजा कॉफ़ी’ में आयोजित की गई है।

एक्सप्लोर नेपाल नेटवर्क द्वारा आयोजित ‘चेर्दुङ पदयात्रा की तस्वीरें’ शीर्षक तीन दिवसीय प्रदर्शनी में जीवन लामाले खींची ३१ तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।

इन तस्वीरों में गौरीशंकर हिम श्रृंखला, स्थानीय जीवनशैली, जिरि उपत्यका, झ्यांकु गाँव, साइक्लिंग, स्थानीय संस्कृति आदि की झलकियां शामिल हैं।

विश्व पर्वतारोहण महासंघ के मानार्थ विशेषज्ञ दूत एवं पर्यटन विशेषज्ञ आङछिरिङ शेर्पा ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने चेर्दुङ के अनुभव साझा करते हुए प्रदर्शनी से चेर्दुङ की चमक बढ़ने पर भरोसा जताया।

प्रदर्शनी उद्घाटन समारोह में मेलुङ गाउँपालिका के अध्यक्ष हिराकुमार थोकर, पर्यावरण पत्रकार समूह के अध्यक्ष चंद्रशेखर कार्की, पर्यटन पत्रकार अमृत भादगाउँले सहित अन्य लोगों ने शुभकामनाएं दीं।

पत्रकार लामाले अपने जन्मस्थल के प्रति अपनी आभार भावना पूरी करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

चेर्दुङ का परिचय

दोलखा का चेर्दुङ प्रकृति और अध्यात्म का संगम है। यहां से हिमालय की सुंदरता, सूर्योदय और सूर्यास्त के मनमोहक दृश्य देखे जा सकते हैं। ढलान से गौरीशंकर हिमाल को निहारते हुए स्वर्ग में पहुंचने का अनुभव होता है। यहाँ मानसिक तनाव, पीड़ा और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।

चेर्दुङ जिरि नगरपालिका के चार और गौरीशंकर गाउँपालिका के दो क्षेत्र में फैला हुआ है। चेर्दुङ से पश्चिम से पूर्व तक हिमालय की लंबी श्रंखला दिखाई देती है। पूर्वी क्षेत्र से ब्रम्श: नुम्बुर, रामदुङ, छेकिगो, धारे मेलुङ्त्से, लाक्पा दोर्जे, टासी लाप्चा, गौरीशंकर, आमा बामरे, गणेश और गोर्खा हिमाल देखे जा सकते हैं। गौरीशंकर हिमाल आँखों के सामने दिखाई देते हैं।

चेर्दुङ धार्मिक दृष्टिकोण से हिंदू और बौद्ध मार्गी के साझा तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है। ढलान के शिखर पर चेर्दुङेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। पास में ही एक बड़ी चट्टान पर गुरु रिम्पोचे (पद्मसम्भव) के पदचिह्न हैं।

हिंदू चेर्दुङेश्वर को त्रिशूल चढ़ाते हैं, जबकि बौद्ध मार्गी रिम्पोचे के सम्मान में धर्ज्यू और लुङदार फहराते हैं।

चेर्दुङेश्वर की पूजा से रोगव्याधि नहीं लगती और वन्य जीव जानवरों को कष्ट नहीं देते, यह मान्यता प्रचलित है। यहां चंडी पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है।

बौद्ध मार्गी मत के अनुसार गुरु रिम्पोचे हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करने के दौरान यहां आए थे और यहां ध्यान करते थे। पहाड़ी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आश्रय स्थल भी है।

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